Acidity in Hindi। एसिडिटी (पेट में जलन) के लक्षण, कारण और उपचार

Acidity in Hindi: एसिडिटी (Acidity) या पेट में जलन आज-कल यह एक आम समस्या मानी जाती है, जो कुछ घरेलू उपायों को अपनाने से ठीक हो जाती है. लेकिन, अभी की स्थिति के अनुसार एसिडिटी बहुत गंभीर समस्या बन गई है.

Acidity in Hindi

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में रहने वाले लगभग 1 करोड़ लोग एसिडिटी यानि की पेट में जलन से पीड़ित हैं. इस रिपोर्ट को देखते हुये हम सभी को एसिडिटी को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके.

एसिडिटी (पेट में जलन) क्या है? – What is Acidity in Hindi?

एसिडिटी (Acidity) (पेट में जलन) का अर्थ है कि, पेट का एसिड भोजन की नली (ग्रासनली या इसोफेगस; Esophagus) में आ जाना. एसिडिटी होने पर पेट के ऊपरी भाग में जैसे कि छाती या सीने में जलन व दर्द होना, खट्टी डकार आना, भूख ना लगना और पेट में गैस बनने जैसी समस्याएँ होती हैं.

खाने की नली में पेट के अम्लीय पदार्थों का आ जाना एसिडिटी का मुख्य कारण होता है. अम्लीय भोजन को टुकड़ों में तोड़ने के लिए पेट में “हाइड्रोक्लोरिक एसिड” (hydrochloric acid) नामक अम्ल होता है.

पेट की आन्तरिक परत हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के प्रति अनुकूलित होती है क्योंकि पेट की आन्तरिक परत शक्तिशाली होते है. लेकिन भोजन नली की परतें इस अम्ल के प्रति अनुकूलित नहीं होती हैं, इसलिए उसमें जलन महसूस होने लग जाती है. बार-बार होने वाली एसिडिटी की समस्या को गर्ड (एसिड भाटा रोग; GERD) कहा जाता है.

एसिडिटी (पेट में जलन) के लक्षण – Acidity Symptoms in Hindi,

एसिडिटी (पेट में जलन​) के लक्षण क्या-क्या होते हैं?

स्वास्थ संबंधी किसी भी समस्या के होने से पहले हमारा शरीर कुछ संकेत देते हैं। इन संकेतो को हम लक्षण कहते हैं। किसी भी व्यक्ति को इन लक्षणो को नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए। एसिडिटी के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं –

  1. छाती या सीने में जलन होना
  2. पेट में सूजन का होना
  3. अत्याधिक डकार आना
  4. मुंह का स्वाद कड़वा होना तथा जी मचलाना (घरघराहट)
  5. मतली या उलटी
  6. ऊपरी पेट में दर्द
  7. पेट फूलना
  8. निगलने में कठिनाई या दर्द
  9. वजन का कम होना
  10. गले में लंबे समय से दर्द
  11. काला मल या मल में खून आना
  12. गले की समस्याएं जैसे कि गले में खराश होना, या आवाज़ भारी होना
  13. लगातार हिचकी आना आदि

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पेट में जलन (एसिडिटी) के कारण – Acidity Causes in Hindi

एसिडिटी (पेट में जलन) क्यों होती है?

  • सही समय पर भोजन न करना- आज-कल लोगो की भाग-दौड़ और व्यस्त भरी जिंदगी हैं। इस कारण बहुत से लोग समय पर भोजन नही ग्रहण कर पते हैं। कभी-कभी पेट में जलन (एसिडिटी) की समस्या इस कारण भी हो जाती हैं।
  • ज़्यादा तला और मसालेदार भोजन करना- अगर आप ज़्यादा तला और मसालेदार भोजन करते है तो आपको पेट में जलन (एसिडिटी) होने कि संभावना बढ़ जाती है।
  • अधिक मात्रा में शराब का सेवन करना- अधिक मात्रा में शराब पीते है तो आपको एसिडिटी (Acidity) (पेट में जलन) की समस्या हो सकती है।
  • तनाव लेना- सभी के लिए तनाव लेना नुकसानदायक साबित होता है। तनाव से एसिडिटी (पेट में जलन) का लक्षण हो सकता है।
  • भोजन में अधिक मात्रा में नमक का सेवन करना- भोजन में सभी तत्वों को पर्याप्त मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए, यदि कोई व्यक्ति अपने भोजन में अधिक मात्रा में नमक का इस्तेमाल करता हैं, तो उनमें कई सारी बीमारियाँ होने की संभावना बढ़ जाती हैं।
  • मोटापा।
  • धूम्रपान तथा दूसरे व्यक्ति द्वारा किया गए धूम्रपान के संपर्क में आना।
  • योगा या शारीरिक व्यायाम में कमी।
  • फाइबर युक्त आहार का कम सेवन करना।
  • शराब या कैफीन युक्त पेय पदार्थ पीना।
  • ज़्यादा भोजन करना, या सोने से तुरंत पहले खाना। ज़्यादा खाने से पेट में अम्ल ज्यादा बनने लगता है और एसिडिटी हो जाती है।
  • कुछ दवाएं जैसे अस्थमा, दर्दनिवारक, सेडेटिव और एंटिडिप्रेसेंट्स दवाएं का सेवन करना।

एसिडिटी (पेट में जलन) का परीक्षण – Diagnosis of Acidity in Hindi

आप सभी जानते हैं की यदि किसी बीमारी का परीक्षण समय रहते ही परीक्षण के द्वारा पता कर लिया जाए तो उस बीमारी या रोग का इलाज करना बहुत आसान हो जाता हैं। इसलिए यदि कोई भी व्यक्ति एसिडिटी (Acidity) की समस्या से पीड़ित है, तो वह इन तरीकों को अपनाकर एसिडिटी (पेट में जलन) का परीक्षण करवा सकता है-

  1. पेट का एक्स-रे कराना
  2. पी.एच टेस्ट कराना
  3. बायोस्कोपी (Biopsy)
  4. एंडोस्कोपी (Endoscopy)
  5. बेरियम स्वालो कराना
  6. इसोफेजियल मेनोमेट्री (Esophageal manometry)
  7. इंपीडेंस मोनिटरींग (Impedance monitoring)

एसिडिटी (पेट में जलन) से बचाव – Prevention of Acidity in Hindi

अपने खाने की आदतों और खाद्य पदार्थों में बदलाव लाकर एसिडिटी होने से बचा जा सकता है। एसिडिटी (पेट में जलन) रोकने के कुछ तरीके निम्नलिखित हैं –

  • अधिक से अधिक ऐसे फल और सब्जियों का सेवन करना जो जो अम्लीय नही होते हैं।
  • खाना खाने से 30 मिनट पहले और खाना खाने के 1 घंटे बाद तक पानी नही पीना चाहिए।
  • रात को सोने से लगभग 1 से 2 घंटे पहले भोजन करना चाहिए।
  • एक दिन में कम से कम 3 लीटर या इससे ज्यादा पानी पीना।
  • एक बार में ज्यादा खाने की बजाए, थोड़ा-थोड़ा भोजन कई बार करना चाहिए।
  • शरीर का वजन स्वस्थ और संतुलित बनाए रखना चाहिए।
  • शरीर को स्वास्थ्य रखने के लिए नियमित व्यायाम करना।
  • ज्यादा टाइट बेल्ट व कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

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